ग्रामीण स्वास्थ्य संकट पर चर्चा
एक्सक्लूसिव

कॉकरेच जनता पार्टी फाउंडर ने ग्रामीण स्वास्थ्य संकट पर उठाए सवाल

कॉकरेच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने ग्रामीण स्वास्थ्य और पेयजल सुविधाओं की कमी पर चिंता व्यक्त की, सरकारी योजनाओं की निगरानी की मांग की।

By : रैपिडो न्यूज़
कॉकरेच जनता पार्टी फाउंडर ने ग्रामीण स्वास्थ्य संकट पर उठाए सवाल

कॉकरेच जनता पार्टी फाउंडर ने प्रभावित गांवों का किया दौरा, स्वास्थ्य और पेयजल सुविधाओं पर उठाए सवाल

बालाघाट। जिले के आदिवासी अंचल में बच्चों की मौत और लगातार बीमार पड़ रहे बच्चों की स्थिति को लेकर कॉकरेच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने शासन-प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। शनिवार 12 सितंबर 2026 को बालाघाट पहुंचे दीपके ने प्रभावित गांवों का दौरा कर ग्रामीणों और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की तथा क्षेत्र के जमीनी हालात की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में आज भी स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल, शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी बनी हुई है।

मीडिया से चर्चा के दौरान अभिजीत दीपके ने कहा कि आदिवासी अंचल में बच्चों के बीमार होने और मौत की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं। उनके अनुसार, ग्रामीणों को प्राथमिक स्तर की स्वास्थ्य सुविधाएं भी पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि समय पर उपचार और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से समस्या गंभीर रूप ले सकती है।

गंदे पानी से बीमारियों का खतरा

दीपके ने प्रभावित गांवों में पेयजल की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई ग्रामीण आज भी झिरिया, तालाब और नदी के पानी पर निर्भर हैं। कुछ स्थानों पर ग्रामीण रेत में गड्ढा खोदकर पानी निकालने को मजबूर हैं। उनके अनुसार, स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता नहीं होने से ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ वास्तव में ग्रामीणों तक पहुंच रहा है या नहीं, इसकी जमीनी स्तर पर निगरानी जरूरी है।

‘एयरपोर्ट चमकाने से देश विश्वगुरु नहीं बनेगा’

अभिजीत दीपके ने कहा कि देश को विश्वगुरु बनाने के लिए केवल एयरपोर्ट, पार्लियामेंट और पीएम आवास को चमकाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को बेहतर जीवन, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने होंगे। उन्होंने कहा कि आजादी के दशकों बाद भी यदि आदिवासी परिवार बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने आदिवासी विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। दीपके ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता की सेवा और वंचित वर्गों की समस्याओं का समाधान करने के लिए चुना जाता है।

प्रभावित परिवारों की आवाज उठाने का दावा

दीपके ने कहा कि प्रभावित गांवों का दौरा करने का उद्देश्य वास्तविक स्थिति को समझना और पीड़ित परिवारों की समस्याओं को सामने लाना है। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनकी आवाज आगे तक पहुंचाने और उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।

इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं, स्वच्छ पेयजल, टीकाकरण और ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि दूरस्थ गांवों में स्वास्थ्य विभाग की पहुंच मजबूत होनी चाहिए, ताकि बीमारी की स्थिति में ग्रामीणों को समय पर उपचार मिल सके।